- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
- 13 साल बाद बने दुर्लभ संयोग में उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब, शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या पर देशभर से पहुंचे श्रद्धालु; शनि मंदिर में स्नान के बाद कर रहे दान-पुण्य
चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जत्रा, हजारों श्रद्धालु पहुंचे दर्शन के लिए; किसानों ने नई फसल भगवान को अर्पित की
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के प्रसिद्ध श्री चिंतामन गणेश मंदिर में चैत्र मास के अवसर पर आयोजित होने वाली पारंपरिक जत्राओं का क्रम जारी है। इसी कड़ी में बुधवार को दूसरी जत्रा आयोजित की गई, जिसमें सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे।
मंदिर के पट तड़के 4 बजे खुलते ही भगवान चिंतामन गणेश का विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद आकर्षक श्रृंगार कर भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया। जत्रा के कारण मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की भीड़ बनी रही और अनुमान है कि देर शाम तक हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
जत्रा के अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से कई किसान भी मंदिर पहुंचे। वे अपने साथ नई उपज के रूप में धान लेकर आए और उसे भगवान गणपति को समर्पित किया। परंपरा के अनुसार किसान मंदिर में अर्पित किया हुआ धान वापस घर ले जाते हैं और इसे शुभ मानकर संभाल कर रखते हैं।
पूजा-अर्चना और विशेष भोग का आयोजन
मंदिर में जत्रा के दौरान विशेष पूजा-अर्चना का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। पंचामृत पूजन और अभिषेक के साथ भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। पूरे दिन मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
मंदिर के पुजारी जयंत शर्मा के अनुसार चैत्र मास की जत्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान चिंतामन गणेश के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार इस समय क्षेत्र में गेहूं और चने की फसल पककर तैयार हो जाती है। इसलिए किसान अपनी नई उपज को बाजार में बेचने से पहले भगवान को अर्पित करते हैं और उनके आशीर्वाद से समृद्धि की कामना करते हैं।
इस वर्ष चैत्र माह में कुल पांच जत्राओं का आयोजन होना है, जिनमें आने वाले तीन बुधवार को भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मंदिर में पहुंचने की संभावना है।